पावर ऑफ़ कम्पाउंडिंग, दुनियां का आठवां अजूबा, पैसों से पैसा बनाना सीखें
पावर ऑफ़ कम्पाउंडिंग, दुनियां का आठवां अजूबा, पैसों से पैसा बनाना सीखें
हेलो दोस्तों, एक बार फिर से आप सबका कंपाउंडिंग माइंडसेट ब्लॉग में स्वागत है, दोस्तों चलिए एक बार के लिए मान लेते हैं कि आपकी एक लॉटरी लग जाती है और उस लॉटरी के प्राइस को लेने के लिए आपको दो ऑप्शंस दिए जाते हैं
पहला कि ये कि एक ही बार में आप ₹ 10 करोड़ का प्राइस लेकर चले जाइए और फिर आपके पास में दूसरा ऑप्शन है कि आप पहले दिन केवल 2 ₹ लेकर जाओ दूसरे दिन चार, तीसरे दिन डबल 8 रुपये और ऐसे ही करके आपको अगले 31 दिनों तक हर दिन दुगुना करके पैसा मिलता जाएगा अब दूसरा ऑप्शन सुनने में आपको लग रहा होगा यह कैसा पागलपन हुआ क्योंकि पहले ऑप्शन में आपको जहां पहले ही दिन ₹10 करोड़ मिल रहे हैं जिसके साथ आप बहुत कुछ कर सकते हैं इन्वेस्ट कर सकते हैं और भी बहुत सारी चीजें कर सकते हैं, है ना और वहीं दूसरे ऑप्शन में आपको पहले दिन केवल 2 रुपये ही मिल रहे हैं कहां ₹10 करोड़ और कहां ₹2 बहुत ही ज्यादा छोटी रकम है और डबल हो हो के कितना ही पहुंच जाएगा है ना, कोई भी इंसान बिना ज्यादा दिमाग लगाए पहले ऑप्शन को चूज कर लेगा
लेकिन अगर आप 1 मिनट रुककर बस 1 मिनट रुककर अच्छे से सोच समझकर दूसरे ऑप्शन को चुनते हैं तो फिर आपके प्राइस मनी के साथ जो मैजिक होगा ना उसे महान साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टाइन के द्वारा दुनिया का आठवां अजूबा बताया गया है क्योंकि दोस्तों अगर आप सेकंड ऑप्शन को चुनते हैं तो पहले दिन भले ही आपको केवल ₹2 मिल रहे हो लेकिन 31 वें दिन आपको 10 करोड़ या 20 करोड़ नहीं, बल्कि पूरे के पूरे 107 करोड़ मिलेंगे यानी कि ₹100 करोड़ से ज्यादा और अगर आप पहले दिन से लेके 21वें दिन के टोटल प्राइस को कैलकुलेट करेंगे तो आपको टोटल 2214 करोड़ के करीब अमाउंट मिलेगा, तो इस ₹2 से लेकर 107 करोड़ के ग्रोथ के पीछे जिस मैजिक का हाथ है ना उसे ही कहते हैं “पावर ऑफ कंपाउंडिंग”(Power of Compounding) कहते हैं, जिसे मैं आपको आज इस ब्लॉग में इतने डिटेल में समझाऊंगा कि आपको इस मैजिक से रिलेटेड एक भी डाउट नहीं रहेगा और इसका इस्तेमाल करके आप भी अमीर बनना सीख जाएंगे|
पावर ऑफ़ कम्पाउंडिंग कैसे काम करता है? (How the Power of Compounding work?)
दोस्तों पैसे से पैसा बनाना एक ऐसा आर्ट है जिसके कांसेप्ट को अगर आप अच्छे से समझ लेते हैं तो आपको अमीर और फाइनेंशियली free बनने से कोई भी रोक ही नहीं पायेगा |
यही वो आर्ट है जिसने वॉर्रेन बुफे, राकेश झुनझुनवाला और विजय कीडिया जैसे नार्मल से लोगों को इतना अमीर बना दिया |ईएक्सप्रेस से लोगों को इतना अमीर बना दिया ज्यादातर लोग जनरली क्या करते हैं कि वह टाइम ट्रेड करके पैसे कमाते हैं वह जिंदगी भर पैसे कमाने के लिए मेहनत करते रहते हैं लेकिन कभी वह यह नहीं सीख पाते हैं कि कैसे वह अपने पैसे को काम पर लगाकर उनसे और पैसे बना सकते हैं कैसे पैसे से पैसा बनता है यह उन्हें पता ही नहीं होता है बस इतना ही नहीं कई लोगों को तो यह भी पता नहीं होता है कि पैसे से भी पैसा कमाया जा सकता है|
यस दोस्तों, आप फाइनेंशियल लिटरेट तब नहीं बनते हैं जब आपकी इनकम महीने के ₹ 5 लाख हो जाए बल्कि आप तब बनते हैं जब अपने पैसों से पैसा बनाना सीख जाते हैं हम एक ऐसे एजुकेशन सिस्टम में बड़े होते हैं जहां हमें पैसे से रिलेटेड कुछ भी सिखाया ही नहीं जाता है हमें जो पैसा कमाने का ग्राफ दिखाया जाता है ना वह कुछ ऐसा दिखता है जबकि अमीर लोगों की अर्निंग का ग्राफ कुछ ऐसा दिखता है|
है ना इन दोनों ग्राफ में डिफरेंस लीनियर ग्रोथ और कंपाउंडेड ग्रोथ का ही है अब देखिए अगर आपको अमीर बनना है तो आपको भी अपने इनकम का ग्राफ ऐसा बनाना होगा ना कि ऐसा और अपने इनकम से आप ऐसा ग्राफ तभी बना सकते हैं जब आप कंपाउंड कंपाउंडिंग के मैजिक को इस्तेमाल करना सीख जाएंगे
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने अपने एक स्पीच में कहा था “Compounding is the 8th wonder of the world, One who understand it Earns, One who Won’t Losses” यानी कि कंपाउंडिंग दुनिया का आठवां अजूबा है जो नहीं समझता है वो खोता है यानी कि लॉस होता है उसका,
कंपाउंडिंग क्या है और यह काम कैसे करती है? (What is Compounding and how it works?)
दोस्तों आज के इस ब्लॉग में मैं आपको काफी डिटेल में समझाऊंगा कि आखिरकार ये कंपाउंडिंग होती क्या है और यह काम कैसे करती है और आप कैसे इस मैजिक का इस्तेमाल करके एक फाइनेंशियल एक्सपर्ट की तरह अपने नेटवर्थ को बढ़ाने में और और पैसे से पैसा बनाने में इसे यूज कर सकते हैं तो यह ब्लॉग आपके फाइनेंशियल लिटरेसी के लिए बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है इसीलिए इस ब्लॉग को पूरा अंत तक जरूर पढ़िएगा|
व्हाट इज कंपाउंडिंग चलिए तो चलिए सबसे पहले यह समझते हैं कि आखिरकार ये कंपाउंडिंग क्या होता है और यह काम कैसे करता है तो दोस्तों कंपाउंडिंग का मैजिक काम करता है कंपाउंड इंटरेस्ट पे जिसे आपने स्कूल में पढ़ा तो जरूर होगा लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ में उसका यूज़ कहां करना है यह हो सकता है आपको ना सिखाया गया हो जहां सिंपल इंटरेस्ट में क्या होता है कि केवल प्रिंसिपल अमाउंट पर ही इंटरेस्ट ऐड होता होता है वहीं कंपाउंड इंटरेस्ट में इंटरेस्ट पर भी इंटरेस्ट ऐड होता रहता है और आपका प्रिंसिपल अमाउंट हर नए सेशन में बड़ा होता जाता है जिससे कि एक समय के बाद एक छोटा इन्वेस्टमेंट भी बहुत बड़ा अमाउंट बन जाता है
एग्जांपल के लिए अगर आपने कहीं पर ₹1 लाख इन्वेस्ट किया है जहां पर आपको 10 % का एनुअल इंटरेस्ट मिल रहा है तो इस हिसाब से पहले साल आपको कितने रुपए मिले, 10000 है ना, इंटरेस्ट के तौर पे अब इस साल के लिए आपका प्रिंसिपल अमाउंट हो जाता है 1,10,000 रुपये यानी कि अब अगले इंटरेस्ट पीरियड में आपको ₹11,000 का इंटरेस्ट मिलेगा और आपका प्रिंसिपल अमाउंट ₹1,21000 हो जाएगा और इसीलिए आपका इंटरेस्ट अमाउंट अबकी बार ₹12100 होगा इसी तरीके से आपका इंटरेस्ट अमाउंट और प्रिंसिपल अमाउंट हर बार बढ़ता जाएगा और एक समय के बाद इनकी बढ़ने की स्पीड बहुत ही ज्यादा तेज हो जाएगी अब क्योंकि आपका प्रिंसिपल अमाउंट और उस पर मिलने वाला इंटरेस्ट ही काफी बड़ा हो चुका है जिससे कि आपको फाइनली एक बहुत बड़ा अमाउंट मिलेगा |
अब कंपाउंडिंग फाइनेंशियल वर्ल्ड में इतना इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि ऑलमोस्ट सारे लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल मार्केट्स कंपाउंडिंग पर ही काम करते हैं चाहे वो इक्विटी मार्केट हो या फिर म्यूचुअल फंड्स हो या फिर बैंक्स ही क्यों ना हो जहां बैंक्स आपको फिक्स्ड और एश्योर्ड रिटर्न्स देते हैं वहीं पे इक्विटी और म्यूचुअल फंड्स आपको सीएजीआर (CAGR=Compounded Annual Growth Rate) यानी कि कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट देते हैं|
अब देखिए ज्यादातर लोग ना कंपाउंडिंग का फायदा इसलिए नहीं उठा पाते हैं क्योंकि उनमें पेशेंस ही नहीं होता है क्योंकि क्या होता है कि कंपाउंडिंग कुछ साल के पेशेंस के बाद ही अपना मैजिक दिखाना शुरू करता है |
शुरुआत में कंपाउंडिंग बहुत ही धीरे काम करता है इसीलिए ज्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि अगले कुछ सालों में कैसे उनका इन्वेस्टमेंट उन्हें अमीर बना सकता है जैसे कि मैंने इस ब्लॉग के स्टार्टिंग में आपको लॉटरी वाला एग्जांपल दिया था जहां शुरुआती अमाउंट केवल ₹ 2 था लेकिन एट द एंड ये अमाउंट हमारी सोच से भी कहीं ज्यादा बड़ा हो गया था चलिए अब क्योंकि वो बस आपको समझाने के लिए एक हाइपोथेटिकल एग्जांपल था इसीलिए अब मैं आपको एक रियल लाइफ एग्जांपल बताता हूं जहां कंपाउंडिंग ने अपना मैजिक दिखाया था यस जिससे कि आप कंपाउंडिंग का रियल लाइफ पावर समझ सकें|
पावर ऑफ़ कम्पाउंडिंग पर वास्तविक उदहारण (Real Example on Power of Compounding)
तो दोस्तों बात है महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव अमलनेर की जहां के मोहम्मद अनवर ने 1980 में विप्रो कंपनी में ₹10000 इन्वेस्ट किए थे जिसके लिए उन्हें विप्रो कंपनी के 100 शेयर्स मिल गए थे अब विप्रो फंडामेंटली काफी अच्छी कंपनी बन गई और इसने जबरदस्त ग्रोथ रेट अचीव किया जिसकी वजह से इनके शेयर का सीएजीआर (CAGR) काफी अच्छा रहा
साथ ही साथ 1980 से लेकर 2019 के बीच तक कंपनी के स्टॉक कई बार स्प्लिट हुए और कंपनी ने कई बोनस शेयर्स भी दिए 2019 के एक रिपोर्ट के हिसाब से अनवर जी के पास विप के 2 करोड़ 56 लाख शेयर्स हो गए यस सोचिए और इसी रिपोर्ट के हिसाब से 2019 में Wipro कंपनी के एक शेयर का प्राइस ₹ 600 था और इस हिसाब से अगर उनकी इन्वेस्टमेंट वैल्यू कैलकुलेट की जाए ना तो यह इस प्रकार है 600 x 2 करोड़ 56 लाख शेयर्स यानी कि लगभग 1500 करोड़ से भी ज्यादा यह है कंपाउंडिंग का रियल लाइफ मैजिक जो केवल ₹10000 के इन्वेस्टमेंट को 1500 करोड़ तक बना सकता है |
वैसे आपके एक्स्ट्रा नॉलेज के लिए मैं आपको यह भी बता दूं कि यह तो बस कैपिटल एप्रिसिएशन था इसके अलावा Wipro कंपनी डिविडेंड्स भी देती है फाइनेंशियल ईयर 2022 में विप्रो ने ₹ 5 पर शेयर का डिविडेंड दिया था और अनवर जी के पास कितने शेयर्स थे 2 करोड़ 56 लाख तो जरा एक काम करिए ₹ 5 से 2 करोड़ 56 लाख को मल्टीप्लाई कर दीजिए फिर देखिए कमाल पता है कितना होता है 12 करोड़ 60 लाख और यह तो मैंने आपको केवल 2022 का ही डाटा बताया है यहां पे कमाल की बात यह है कि Wipro हर साल अपने शेयर होल्डर्स को डिविडेंड देती है और कई बार तो यह डिविडेंड पता है साल में दो बार दिया जाता है कई लोग अपने डिविडेंड इनकम को यूज करके कंपाउंडिंग के मैजिक को बूस्ट करते हैं जिस पर मैं जल्द ही एक काफी डिटेल में ब्लॉग लेकर आऊंगा साथ ही इस ब्लॉग में मैं आपको अमीर लोगों के पैसिव इनकम के बारे में भी बताऊंगा |
तो चलिए अब जब हम यह समझ चुके हैं कि आखिरकार कंपाउंडिंग क्या होता है तो हम यह जानते हैं कि कैसे हम इसका फायदा उठाकर अमीर बन सकते हैं और अपने पैसों को और पैसे बनाने के लिए काम पर लगा सकते हैं ताकि थोड़ा हमें कम काम करना पड़े है ना दोस्तों कंपाउंडिंग का मैजिक हमें तब देखने को मिलता है जब ज्यादा से ज्यादा समय के लिए हम अपने पैसे को ग्रो होने देते हैं टाइम कंपाउंडिंग के लिए सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर है आप जितना जल्दी इन्वेस्टमेंट करना शुरू कर दोगे आपका पैसा उतना ही ग्रो करेगा |
Example-1
एग्जांपल के लिए मान लेते हैं कि आपको 25 साल की उम्र में कंपाउंडिंग का पता चलता है और आप हर महीने ₹5000 की SIP हर महीने 30 सालों के लिए शुरू करते हैं यानी की जब तक कि आप 55 साल के ना हो जाएं आपको अपने इन्वेस्टमेंट पे पर ईयर एवरेज 14 पर का रिटर्न मिलेगा एवरेज मान लेते हैं तो 30 सालों के बाद में आपकी ₹18 लाख की टोटल इन्वेस्टमेंट पे मैच्योरिटी वैल्यू होगी ₹ 2 करोड़ 78 लाख यस,
Example-2
पर चलिए अब मान लेते हैं कि आपको 35 साल की उम्र में कंपाउंडिंग का पता चलता है और आप ₹10,000 की मंथली एसआईपी (SIP) शुरू करते हैं और इस केस में भी आप अपनी एसआईपी तभी रोकेंगे जब आपकी उम्र 55 की हो जाएगी यानी कि इस केस में आप 20 सालों तक इन्वेस्टमेंट करते रहेंगे तो 20 सालों के बाद में 14 पर्सेंट पर ईयर की इंटरेस्ट के अकॉर्डिंग 24 लाख के इन्वेस्टमेंट पे आपकी टोटल मैच्योरिटी वैल्यू होती है ₹ 1 करोड़ 32 लाख
Power of Compounding-पैसों से पैसा कैसे बनाएं 16
Example-3
अब मान लेते हैं कि आपको 45 की एज में कंपाउंडिंग के बारे में पता चलता है और इस बार आप ₹20,000 की मंथली एसआईपी शुरू करते हैं कि चलो ठीक है थोड़ा लेट पता चला है तो थोड़ा ज्यादा पैसे लगाते हैं और इस केस में भी आप अपनी एसआईपी तभी रोकेंगे जब आपकी ऐज 55 की हो जाएगी यानी कि इस केस में आपका पैसा केवल 10 साल तक ही इन्वेस्टेड रहेगा तो 10 सालों के बाद में 14 पर्सेंट पर ईयर की इंटरेस्ट के अकॉर्डिंग ₹ 24 लाख के इन्वेस्टमेंट पर आपकी टोटल मैच्योरिटी वैल्यू होगी 52 लाख होगी जो की एक करोड़ भी नहीं पहुंचा तो आप इस एग्जांपल में साफ-साफ चीज को देख सकते हैं
कि आप जितनी देर से और जितने कम टाइम के लिए एसआईपी के थ्रू इन्वेस्टमेंट करते हैं आपकी वेल्थ उतनी ही कम बन रही है जबकि लास्ट के दोनों केस में देर से ही सही पर आपने पहले वाले केस से ज्यादा इन्वेस्ट किया था फिर भी पहले वाले केस से कम वेल्थ जनरेट हुआ इसीलिए दोस्तों आपको जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी इन्वेस्टमेंट शुरू कर देना चाहिए भले ही आपका इन्वेस्टिंग अमाउंट छोटा हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता
अब दूसरा सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर जो कंपाउंडिंग को अफेक्ट करता है वो है रेट ऑफ इंटरेस्ट आपको जितना ज्यादा रेट ऑफ इंटरेस्ट मिलेगा आपकी इन्वेस्टमेंट उतनी तेजी से ग्रो होगी या बढ़ेगी | अगर आप कम रिस्क लेना चाहते हैं तो आप इंडेक्स फंड (Index fund) में इन्वेस्ट कर सकते हैं जहां आपको ऑन एन एवरेज 12 से 15 पर तक का इंटरेस्ट मिल जाता है अगर आप थोड़ा और रिस्क लेना चाहते हैं तो आप म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में इन्वेस्ट कर सकते हैं जहां पे आपको 14 से 18 पर्सेंट तक का ऑन एन एवरेज रिटर्न मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न आपको मिलेगा स्टॉक्स और कंपनीज में इन्वेस्ट करके लेकिन उसमें रिस्क भी काफी ज्यादा होता है |
मैं पहले ही बता देता हूं आपको वॉरेन बफे ने स्टार्टिंग में ही कंपाउंडिंग के मैजिक को समझ लिया था और उन्होंने लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट स्टार्ट कर दिए थे लेकिन साथ ही उन्होंने दूसरे इंपॉर्टेंट फैक्टर्स जो कि है रेट ऑफ इंटरेस्ट इस पे भी काफी ध्यान दिया था उन्होंने ऐसी कंपनीज को फिल्टर किया जिनके बिजनेस बहुत ही स्ट्रांग थे और जिनके लॉन्ग टर्म ग्रोथ के चांसेस बहुत थे
उन्होंने अपना बहुत सारा समय कंपनीज के बैलेंस शीट्स यरली रिपोर्ट्स और फंडामेंटल्स स्टडी करने पर इन्वेस्ट किया और फिर कंपनीज जैसे कि कोका कोला, अमेरिकन एक्सप्रेस, एप्पल में इन्वेस्ट किया यह कंपनीज बहुत ही तेजी से ग्रो हुई जिनके कारण उन्हें बहुत अच्छा इंटरेस्ट रेट मिला और उनके लिए कंपाउंडिंग और भी ज्यादा पावरफुल तरीके से काम किया |
इंडिया के टॉप इन्वेस्टर्स जैसे कि राकेश झुनझुनवाला, विजय केडिया इन लोगों ने भी इसी तरीके से अच्छे बिजनेस में इन्वेस्ट किया जिनसे उन्हें बहुत अच्छा रेट ऑफ इंटरेस्ट मिला और साथ ही लॉन्ग टर्म होल्ड करने की वजह से उन्हें कंपाउंडिंग का मैजिक भी दे देखने को मिला |
अब दोस्तों अगर आप भी कंपाउंडिंग का मैजिक देखना चाहते हैं तो आपको इन दो चीजों पर ध्यान देना होगा जिसमें से पहला है टाइम और दूसरा है इंटरेस्ट रेट अब आप अपने रिस्क लेने की कैपेसिटी के हिसाब से इंडेक्स फंड म्यूचुअल फंड या स्टॉक्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं अगर आप स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते हैं तो इस बात पे ध्यान दें कि आप अच्छे बिजनेस में इन्वेस्ट करें जिनके लॉन्ग टर्म में अच्छे ग्रोथ के चांसेस हैं |
साथ ही आप जितना जल्दी हो सके इन्वेस्ट करना स्टार्ट कर दें और अपने पैसे को काम पर लगाकर पैसे कमाना शुरू कर दें आशा कर करता हूं कि कंपाउंडिंग के पावर को अच्छे से आप समझ गए हैं और अब आप इसे अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं अगर फिर भी आपको कोई डाउट है तो कमेंट सेक्शन में जरूर पूछिए तो आज के ब्लॉग में इतना ही, उम्मीद करता हूं कि आपको इस ब्लॉग से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा अगर यह ब्लॉग आपको वैल्युएबल लगा हो तो इसे लाइक जरूर कीजिएगा और फाइनेंशियल एजुकेशन स्प्रेड करने के लिए अपने दोस्तों और फैमिली के साथ में इसे शेयर जरूर कीजिएगा साथ ही ब्लॉग पेज को सब्सक्राइब कर दीजिएगा ताकि आपको ऐसे ही और भी फाइनेंशियल ब्लॉग्स देखने के लिए मिलते रहे और आपकी नॉलेज भी इंक्रीज होती रहे
धन्यवाद
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